তোমাকে ভালোবেসেছি বলেই
কলঙ্কের দাগ কপালে।
সেও ভালো।
অব্যক্ত কথায় প্রাণের জোয়ার
তোমায় টেনেছে কাছে।
দিয়া জ্বালো।
বিরহ রোদনে কোন অবেলায়
অশ্রুধারায় ভেসেছে কপোল।
বৃষ্টি ঢালো।
বৈধতার কাঁটাতার পেরিয়ে
হৃদয়ে হৃদয় জড়ানো।
কথা বলো।
শরীর নয় দাও এক ফালি চাঁদ,
জ্যোৎস্নার আদর হয়ে
ঘোচাও কালো।
দিশাহীন পথ চলার শেষে
এক চিলতে বাঁচার আলো।
সেই ভালো।
कलंकिनी
आपसे प्यार किया
कपाल मेरा कलंकित हुआ
होने दो.
अव्यक्त भाषाओँ से दिल में ज्वार आया
तुम्हे पास और पास बुलाया
दीया जलाओ
विरहा रोदन के किसी असमय
अश्रु धारा से कपाल मेरा धुला
बरसात गिराओ
वैधता के कांताजाल को लांघकर
दिल दिलसे मिला
कुछ बोलो
शरीर नहीं दो मुझे एक चाँद का टुकड़ा
चांदनी की सुनहरी प्यार बनके
अन्धकार मिटाओ.
दिशाहीन पथ चलते चलते
एक छोटी सी आशा
रहने दो.
दीपांकर चौधुरी
२६/०२/२०१३
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