ছুটি আমার ছুটি
আমার ছোট্টো বেলার ছুটি
আজকে যেন নেইকো তাড়া
সকল বেলা জুটি |
আমার ছুটি শান বাঁধানো, পুকুর-পাড়ের ঘাটে
আমার ছুটি বকুল তলায় , ফুল কুড়ানো মাঠে ,
আমার ছুটি মেঘ-ভাঙা ঐ, বৃষ্টি বাদল বেলা
আমার ছুটি ইচ্ছে-ডানায় , ভর করে পথ চলা ,
আমার ছুটি ছাদের কোনে , গ্রীষ্মে দুপুর রোদে
আমার ছুটি শীতের দেশে , কম্বলে চোখ মুদে |
আমার ছুটি শারদীয়া , মায়ের আগমনে
আমার ছুটি বকুল ঝরা , কাশের বনে বনে ||
আমার ছুটিনদীর পারে , গান গেয়ে পথ চলা
আমার ছুটি সাগর-বেলায়, মন কেমনের পালা |
বড় বেলার ছোট্টো ছুটি , পায় না কোনো পথ,
শুধু জানে ঐ পথেতে , আসবে ছুটির রথ ,
সেই রথেতে চড়ে আমি , ছুটব বহু দূর
হেথায় শুধু থাকবে পড়ে , ছুটি শেষের সুর,
ছুটবে যখন রথের চাকা , ফিরবো নাকো আমি
পিছু ফিরে দেখবো নাকো কোন ছুটিটা দামী ||
দীপঙ্কর চৌধুরী
২৮/০২/২০১৪
छुट्टी
छुट्टी रे छुट्टी
मेरे बचपन कि छुट्टी
आज नहीं है कोई जल्दी
न है कोई ड्यूटी
मेरी छुट्टी छिपी है, गोबर से आँगन लेपने में
मेरी छुट्टी छिपी है, तालाब के किनारों में
मेरी छुट्टी छिपी है, बकुल के छाया के नीचे
मेरी छुट्टी छिपी है, फूलों के बगीचों में
मेरी छुट्टी छिपी है, टूटते-गरजते बादलों के नीचे
मेरी छुट्टी छिपी है, वृश्टि बादलों के बेलाओं में
मेरी छुट्टी छिपी है, छत के किसी कोने में
मेरी छुट्टी छिपी है, दोपहर की तीव्र धुप में
मेरी छुट्टी छिपी है, सर्दी के मौसम में
मेरी छुट्टी छिपी है, कम्बल की सुख में
मेरी छुट्टी छिपी है, शर्त के सुहानी ऋतू में
मेरी छुट्टी छिपी है, माँ के आगमन की ख़ुशी में
मेरी छुट्टी छिपी है, बकुल के पतझर में
मेरी छुट्टी छिपी है, काश-फूलों के झाड़ियों में
मेरी छुट्टी छिपी है, नदियों के किनारों में
मेरी छुट्टी छिपी है, उन किनारों पर टहलते हुए बेसुध सुरों में
मेरी छुट्टी छिपी है, सागर के किनारों में
मेरी छुट्टी छिपी है, बिना किसी वज़ह के बेचैन होने में
बड़े होकर यह भाग दौड़ से मिलता नहीं कोई पथ
मालूम है पथ में है कहीं मिलेगा छुट्टी का रथ
उस रथ पर सवार होकर मै जाउंगा बहुत दूर
यहीं पर धरा रह जायेगा छुट्टियों का सुर
जब घूमेगा इस रथ का चक्र फिर कभी भी न लौटूंगा
कौन सा छुट्टी है अधिक मूल्यवान यह भी न मिलाऊंगा
दीपंकर चौधुरी
२८/०२/२०१४